Thursday, May 8, 2014

लत नहीं रही...

तू आई तू चली गयी जो पाया था सब खो दिया ...
कुछ भी पाने की या खोने की अब हसरत नहीं रही ...

जब हँसते थे तो हंसती थी जब रोते थे तो रोती थी ...
तेरे जाने के बाद अब वो कुदरत नहीं रही ...

तेरी तन्हाई ने मेरा इस हद तक साथ दिया ...
बे-परवाह ! अब तेरे साथ की मुझे लत नहीं रही ...

कल रात एक तूफ़ान ने औकात दिखा दी अपनी ...
परिंदों के सर पर अब छत नहीं रही ...


लगता है खेलने को कोई नया खिलौना मिल गया ...
अब उस वफ़ा की देवी को मेरी जरुरत नहीं रही ...


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