संभल जाएं वो, हर वक़्त जो , खोए पैमानों में रहते हैं ...
जिनके हाथ है कमान शहर की वो तयखानों में रहते हैं ...
अब कौन बचाए शहर को बर्बादी के मंजर से ...
शहर के जितने शहंशाह हैं , सब मयखानों में रहते हैं ...
जिनके हाथ है कमान शहर की वो तयखानों में रहते हैं ...
अब कौन बचाए शहर को बर्बादी के मंजर से ...
शहर के जितने शहंशाह हैं , सब मयखानों में रहते हैं ...
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