सूनी देखी हैं मैंने दहलीज अक्सर महलों की
बहारों को खेलते मैंने झोंपड़ियों में देखा है
जब होनी चाहिए थी धुन कोने-कोने में शहनाई की
मैंने मायूसी का तांडव उन घड़ियों में देखा है
घूमता है यहाँ दिन रात गुनहगार खुले-आम
इन्साफ को जकड़े मैंने हथकड़ियों में देखा है
भले ही तुम खोजो ख़ुशी को दौलत के बाज़ारों में
हर ख़ुशी को मैंने तो बस फुलझड़ियों में देखा है
तू क्या जाने उतार चढाव ज़िन्दगी के रवि
वक़्त को तो तूने सिर्फ दीवार-घड़ियों में देखा है
बहारों को खेलते मैंने झोंपड़ियों में देखा है
जब होनी चाहिए थी धुन कोने-कोने में शहनाई की
मैंने मायूसी का तांडव उन घड़ियों में देखा है
घूमता है यहाँ दिन रात गुनहगार खुले-आम
इन्साफ को जकड़े मैंने हथकड़ियों में देखा है
भले ही तुम खोजो ख़ुशी को दौलत के बाज़ारों में
हर ख़ुशी को मैंने तो बस फुलझड़ियों में देखा है
तू क्या जाने उतार चढाव ज़िन्दगी के रवि
वक़्त को तो तूने सिर्फ दीवार-घड़ियों में देखा है
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