Thursday, February 26, 2015

दिल को इंतजार नहीं रहा

देखता रहता है खोया खोया सा इधर उधर
किसी का भी अब दिल को इंतजार नहीं रहा

इतना भटका प्यार की प्यास में मारा मारा
प्यास मर गई और अब वो करार नहीं रहा

ये वोही है जिसे इक पल का भी चैन नहीं था
शांत है अब दिल इतना बेकरार नहीं रहा

जो इस पथ्थर दिल पे फिर से चोट कर सके
ज़माने में अब ऐसा कोई हथियार नहीं रहा

बदतमीज सा हो गया है अब एक नहीं सुनता
दिल मेरा अब पहले सा समझदार नहीं रहा

मायूस होके लौट गए सब हंसी मांगने वाले
खुद लूट चूका हूँ मैं अब जमींदार नहीं रहा

कर्जवान हुआ करता था किसी के प्यार का
सब चूका दिया अब किसी का उधार नहीं रहा

आंधी बनके दिल्लगी सब उड़ा ले गई
फकीरों का सब लूट गया घर बार नहीं रहा ...

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