सोफे हैं , कालीन है , झुमका है , झूमर है …
मगर घर जैसा तेरे घर में कुछ भी नहीं है …
मेरे घर में प्यार है , वफ़ा है , दुलार है …
अफ़सोस ये सब तेरी नज़र में कुछ भी नहीं है …
मेरा दिल बाजार है ,सुकून , ख़ुशी और ख़ाबों का …
तेरे लायक मेरे बाज़ार सदर में कुछ भी नहीं है …
मैंने माना हैं लाख खामियां तेरे अंदर साजन मेरे …
फिर भी तू नहीं तो मेरे सफर में कुछ भी नहीं है …
सोफे हैं , कालीन है , झुमका है , झूमर है …
मगर घर जैसा तेरे घर में कुछ भी नहीं है …
मगर घर जैसा तेरे घर में कुछ भी नहीं है …
मेरे घर में प्यार है , वफ़ा है , दुलार है …
अफ़सोस ये सब तेरी नज़र में कुछ भी नहीं है …
मेरा दिल बाजार है ,सुकून , ख़ुशी और ख़ाबों का …
तेरे लायक मेरे बाज़ार सदर में कुछ भी नहीं है …
मैंने माना हैं लाख खामियां तेरे अंदर साजन मेरे …
फिर भी तू नहीं तो मेरे सफर में कुछ भी नहीं है …
सोफे हैं , कालीन है , झुमका है , झूमर है …
मगर घर जैसा तेरे घर में कुछ भी नहीं है …
No comments:
Post a Comment