बुरे वक्त में जरूरतमंद का साथ नहीं छोड़ा मैंने …
कितने ही दबे होठों की चुप्पियों को तोडा मैंने …
वोही आदतें , संस्कार , भोलापन और सादगी …
शहर में रहता हूँ मगर गांव नहीं छोड़ा मैंने …
कितने ही दबे होठों की चुप्पियों को तोडा मैंने …
वोही आदतें , संस्कार , भोलापन और सादगी …
शहर में रहता हूँ मगर गांव नहीं छोड़ा मैंने …
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