Sunday, September 21, 2014

तस्वीर

उसकी तस्वीर सामने आई आज मुद्दतों के बाद ...
सर से चली एक कम्पन सी मेरे पांव तक पहुंची ...

वोही अंदाज-ऐ-मुस्कराहट वोही कातिल हर अदा ...
निकल तस्वीर से वो हूर परि मेरी बाँहों तक पहुंची ...

एक अच्छे घर के लड़के ने तेरा थाम लिया दामन ...
खबर ये शहर शहर होती हुई मेरे गाँव तक पहुंची ...

अच्छा था वो फैसला मुझे छोड़ के उसको अपनाना ...
धूप धूप होती हुई आखिर छाओं तक पहुंची ...

तू पाक पवित्र है प्रिये कोई दाग नहीं है तुझपे ...
तू गंगा जैसी है तभी शिव की जटाओं तक पहुंची ...

तू खुश रहे , हंसती रहे ,फुले फले ,यश ख्याति हो...
निकलकर येही दुआ मेरे दिल से फिजाओं तक पहुंची ...

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