अच्छा हो के दिलों में फिर से प्यार आ जाए ...
इससे पहले की आँगन में दीवार आ जाए ...
माथे से अपनी कीमत की पर्ची हटा लूँ मैं ...
इससे पहले के मेरे घर में बाजार आ जाए ...
खुदा करे किसी रोज मैं घर से गुस्से में निकलूं ...
और सामने से कोई गद्दार आ जाए ...
काश के मोहब्बत के नसीब में ऐसा होता ...
जो साथ है इस पार वो उस पार आ जाए ...
गरीब झोंपड़ी मेरी महल सी चमक उठे ...
ठहरने इसमें कभी अगर मेरा यार आ जाए ...
बेहतर हो तू रास्ते पर आ जाए दोस्त मेरे ...
इससे पहले के हाथ में हथियार आ जाए ...
गर पास से तू गुजर जाए खुशबू बिखेरती ...
खुदा कसम रूखे चेहरों पर निखार आ जाए ...
वो बना रहा हो जोड़े ईश्क और हुस्न के...
खुदा करे तेरे हिस्से ये गंवार आ जाए...
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