Monday, November 17, 2014

वो सांवरी सी लड़की

मेरी बेचैन आँखों को बड़ा चैन मिले
देखूं जब भी मैं जी भरके
वो सांवरी सी लड़की ...
छू लें जो मुझको कभी उसकी निगाहें
नजरें झुकाये शर्माए
वो सांवरी सी लड़की ...

मैं बैठा ही रहूँ आगोश में उसके
देखता ही रहूँ हसीनियां उसकी
आँखों पे गालों पे माथे पे हाथों पे
उसे चूमती ही रहें मेरी बेसबर निगाहें
क्या क्या सोचे मुझे देखे देखती ही रहे
वो सांवरी सी लड़की ...

मेरे कंधे पर अपना सर टिका के वो
ख़ामोशी से देखती रहे लहरों को
पकड़के हाथ मेरा वो देखती रहे
मेरे हाथों की बेबस लकीरों को
कभी कुछ पूछे कभी कुछ बताये मुझे
वो सांवरी सी लड़की ...

मीलों चले मेरे साथ साथ हाथों में हाथ
कभी चुप रहे वो कभी करे कोई बात
कभी मुस्कुराये कभी जोर से हँसे
कभी तारीफ करे कभी तंज कसे
क्या होगा अपना कैसे जिएंगे मुझसे पूछे
वो सांवरी सी लड़की ...

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