Thursday, November 13, 2014

सिकंदर

इस धोखे में मत रहना के तू कलन्दर है कोई ...
तू अगर जो दरिया है  , तो समंदर है कोई ...
इस शहर की रंगीनियों की हकीकत कुछ और है ...
वो बूढ़ा जो भूखा सोता है , सुना है सिकंदर है कोई ...

No comments:

Post a Comment